www.likhti.com 05 Dec, 2023
अब क्या लिखूं तेरी तारीफ में मेरे हमदम, अलफाज कम पड़ जाते है तेरी मासूमियत देखकर !
अल्फाज खुशी दे रहे थे मुझे और, वो मेरे इश्क की तारीफ कर रही थी !
मुझको मालूम नहीं हुस़्न की तारीफ, मेरी नजरों में हसीन वो है जो तुम जैसा हो !
मासूम सी सूरत तेरी दिल में उतर जाती है, भूल जाऊं कैसे मैं तुझे, तू मुझे हर जगह नजर आती है !
देख कर तेरी आँखो को मदहोश मैं हो जाता हूँ ! तेरी तारीफ किये बिना मैं रह नहीं पाता हूँ !
मुझे देखकर शर्म से नजरें चुरा लेती है वो, उसे बेवफा न समझ लूं इसलिए, चेहरे से जुल्फों को हटा जरा सा मुस्कुरा देती है वो !
तू भी मेरे दिल के Library की वो डायरी है, जिसे हम पढ़ना कम और देखना, ज्यादा पसंद करता है !
मत मुस्कुराओ इतना कि फूलों को खबर लग जाए, कि करे वो तुम्हारी तारीफ, और तुम्हें नजर लग जाएँ !
नशीली आँखों से वो जब हमें देखते हैं, हम घबराकर आँखें झुका लेते हैं, कौन मिलाए उनकी आँखों से आँखें, वो आँखों से अपना बना लेते है !
मेरे दिल के धड़कनों की वो जरूरत सी है, तितलियों सी नाजुक परियों जैसी खूबसूरत सी है !
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